सूर्य को जल अर्पण करने से पहले ध्यान रखें ये नियम नहीं तो हो सकता है नुकसान..खबर पड़े !!!

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हिंदू धर्म और शास्त्रों के अनुसार दिन का आरंभ सूर्य को अर्घ्य देकर उनकी वंदना से करना चाहिए। सूर्यदेव को प्रत्यक्ष देवता कहा जाता है क्योंकि उन्हें मूर्त रूप में देखा जा सकता है, अर्थात हर कोई इनका साक्षात दर्शन कर सकता है।

सूर्य को ज्योतिष में आत्मा का कारक माना जाता हैं। ऊर्जा और पॉज़िटिविटी लेने के लिए सूर्य की पुजा करनी चाहिए। शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति सूर्य देव को नमन करते हैं, उनके अंदर गज़ब का आत्मविश्वास होता हैं, और उनके ऊपर तंत्र-मंत्र का कोई भी प्रभाव नहीं पड़ता हैं। शास्त्रों के अनुसार अगर आपकी जन्मकुंडली में सूर्य शुभ है तो समाज में मान-सम्मान के साथ-साथ उच्च पद की भी प्राप्ति होती है। हंसते-खेलते परिवार का साथ मिलता है और रोगों से भी कोसों दूर रहेंगे। यदि सूर्य कमजोर है तो जीवन में बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। यदि आप विधानपूर्वक उन्हें अर्घ्य नहीं देंगे तो सकारात्मक की बजाय नकारात्मक परिणाम मिल सकते है।

सूर्य देव को अर्घ्य देते वक्त रखें ध्यान

(1) ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर साफ और स्वच्छ वस्त्र पहनें चाहिए।

(2) जब सूर्य लालिमा युक्त हो उस समय उनके दर्शन करके अर्घ्य देना शुभ होता है।

(3) अर्घ्य देते समय हाथ सिर से ऊपर होने चाहिए। ऐसा करने से सूर्य की सातों किरणें शरीर पर पड़ती हैं। सूर्य देव को जल अर्पित करने से नवग्रह की भी कृपा रहती है।

(4) सूर्यदेव की तीन परिक्रमा करें।

(5) सूर्य देव को मीठा जल चढ़ाने से लाभ मिलता हैं, मीठा जल से तात्पर्य हैं की साफ जल में मिस्री मिलाये|

(6) सूर्य को अर्घ्य देते समय इस बात का ध्यान दें की जल की धारा धीरे-धीरे दें।

(7) सूर्य देव को चढ़ाया गया जल किसी के पैरो को स्पर्श ना करें।

(8) सूर्य देव का चढ़ाया गया जल आप अपने पौधों के गमलो में दें सकते हैं। इससे वो किसी के पैर के नीचे नहीं आता हैं।

(9) अगर सूर्य देव को चढ़ाया गया जल किसी के पैर के नीचे आ जाता हैं तो आपको अर्घ्य देने का लाभ नहीं मिलता हैं।

(10) सूर्य देव के चढ़ाये गए जल में से कुछ जल बचा ले और उसको अपने हाथ में लेकर चारों दिशाओ में छिड़कना चाहिए। ऐसा करने से हमारे आस-पास का वातावरण पाजीटीव रहता हैं।

 

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