अपने साथ समय बिताने से होते हैं यह फायदे, जानकार आप भी रह जाएंगे हैरान …!

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अकेलापन खराब नहीं होता। हंसना, मुस्कराना सबके लिए आवश्यक है। एक शायर ने कहा है :-

या तो दीवाना हँसे, या तू जिसे तौफीक दे
वरना इस दुनिया में रहकर मुस्करा सकता है कौन।

यह पंक्ति हम सबके लिए लागू होती है। ऐसे में हमें अपने साथ भी कुछ समय बिताना चाहिए जिसके एक नही पूरे दस लाभ होते हैं। आज की दुनिया में सब एक दूसरे से किसी न किसी माध्यम से जुड़े हुए हैं, और धीरे-धीरे स्वयं के साथ समय बिताने की अवधारणा को भूल रहे हैं (या अन्य लोगों को खुद के लिए समय देना भी)। बेहतर तकनीक और संचार उपकरणों के साथ-साथ, हमारी सामाजिक मानसिकता से ऐसा लगता है जैसे अकेले समय बिताना एक बुरी चीज़ है।
हम सभी उन लोगों के बारे में तुरंत धारणा बना लेते हैं ,जो मूवी थियेटर में या रेस्तरां में अकेले जाते हैं। हम यह मान लेते हैं कि ये लोग किसी तरह से अकेले , नाखुश, स्वाभाव से बुरे हैं या उनमें कोई ख़ामियां हैं। इस लेख के माध्यम से आपको बता रहे हैं कि कैसे अपने साथ समय बिताना न केवल एक खुशनुमा अनुभव हो सकता है, बल्कि हमारे लिए फायदेमंद भी हो सकता है।

हम अपने खुद के साथ का आनंद लेना सीखते हैं:
कितनी बार ऐसा हुआ है कि, आप अपनी मनपसंद जगह या आयोजन में इसलिए नहीं गए क्योंकि, आपको साथ जाने वाला कोई मिला नहीं ?
संभावना है, ऐसा अनगिनत बार हुआ होगा। खुद के साथ समय बिताने से आप इसके साथ जुड़े हर अनुभव के लिए अधिक सहज बन जाते हैं – शांति , किसी अन्य व्यक्ति का सहारे या बैसाखी के रूप में न होना, और हर अनुभव को पूरी तरह से मग्न होकर महसूस करना।

 यह आज़ादी और आत्मनिर्भरता की एक बड़ी भावना प्रदान करता है:
जब आप अकेले होते हैं, तो आप अपनी शर्तों पर और अपने मन का काम कर सकते हैं। जब भी आप कुछ करना चाहते हैं, आपको किसी और के समय को ध्यान में रखने की भी ज़रूरत नहीं है। सब कुछ आप पर निर्भर है और आप पर किसी का नियंत्रण भी नहीं होता।
 हम खुद को बेहतर जानने का अवसर मिलता हैं :
जब हम दूसरों से घिरे होते हैं, तो हम (जागरूक रूप से या अनजाने में) अपना व्यवहार उस स्थिति के अनुसार उचित रखते हैं या वह करते हैं जिससे हमें दूसरों की प्रशंसा मिले। हम अपने स्वभाव के कुछ पहलुओं को छिपाते हैं, अनजाने में ही सही। अपने साथ समय बिताते हुए आप अपने इन्हीं छिपे हिस्सों को और करीब से जान सकते हैं। जब आप अकेले होते हैं तो आप मनचाह व्यवहार कर सकते हैं और यह आपको मदद करता है यह जानने में कि आप चीजों के बारे में वास्तव में कैसा महसूस करते हैं। इसके परिणामस्वरूप हमें सटीक जानकारी और एक पहचान प्राप्त होती है की हम हैं कौन?
 यह तनाव-मुक्त होने का उपाय भी है:
अकेले समय व्यतीत करना, सार्थक और आनंददायक क्रियाकलापों में भाग लेना, इत्यादि उस तनाव को कम करता है जो काम, अध्ययन, रिश्ते आदि के कारण हमारे भीतर एकत्रित हो जाता है। ये गतिविधियां दूसरों के साथ से भी मज़ेदार हो सकती हैं, लेकिन एकांत में आपके ऊपर दूसरों की अपेक्षाओं का बोझ नहीं होता और आप अपने असल रूप में रह सकते हैं।
यह उत्पादकता बढ़ाता है:
क्या आपका कभी किसी के साथ मतभेद होने के 4 घंटे बाद, आपको यह विचार आए हैं की आपको अपनी बात रखने की लिए क्या बोलना चहिए था?
एकांत में रहने और मन की शांत स्थिति में आपके विचारों पर प्रभाव पड़ता है। कुछ लोगों के पास यह उपहार होता है कि वह किसी भी समय नए और स्पष्ट विचारों को सही ढंग से व्यक्त कर पाते हैं, लेकिन हम में से ज्यादातर लोग स्पष्ट, तर्कसंगत बातें तभी सोच पाते हैं जब हम अकेले होते हैं। इसका कारण यह है कि एकांत में हमारे विचारों के लिए कोई रोक, विचलन या अपेक्षाएं नहीं होती हैं और इसलिए हम सोच समझकर चुन सकते हैं की हम क्या करना चाहते हैं।
यह हमें चिंतन करने का अवसर प्रदान करता है
चिंतनशील सोच महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह आत्म-मूल्यांकन और खुद को बेहतर बनाने का अवसर प्रदान करती है। आम तौर पर, हम अपने दिनचर्या में इतने व्यस्त रहते हैं कि हमारे पास दो बार भी सोचने का समय नहीं होता कि हम क्या कर रहे हैं और क्यों कर रहे हैं। अकेले समय बिताने से हम, हमारे द्वारा किए गए सभी कार्यों के बारे में, हमारे द्वारा चुने गए सभी विकल्पों के बारे में और उनका खुद पर और आसपास के लोगों पर क्या प्रभाव पड़ता है, इसके बारे में सोच पाते हैं। हमें हमारे कार्यों का मूल्यांकन करने और जिन कार्यों को हम स्वीकार्य नहीं मानते उन में बदलाव करने का अवसर मिलता है।

 यह हमारी ऊर्जा में सुधार करता है:

लगातार लोगों से घिरा होना काफ़ी थकान भरा हो सकता है। लगातार नई जानकारी लेना और उस पर प्रतिक्रिया देना मस्तिष्क के लिए बहुत मुश्किल काम है। कुछ समय अकेले बिताने से ऊर्जा की भरपाई की जा सकती है जो निरंतर काम करने से खो जाती है। और आपको ज़्यादा जोश के साथ जिंदगी की दौड़ में वापिस लाने में मदद भी करता है।

यह संतुलन की भावना को पुनस्र्थापित करता है

बहुत अधिक बातचीत हमारे संतुलन को बिगाड़ कर हमारी ऊर्जा समाप्त कर सकती है। जैसा कि मैंने पहले बताया, दूसरों से बहुत समय घिरे रहने के कारण हमारी स्पष्टता से सोचने की शक्ति और स्वतंत्रता समाप्त हो जाती है। निजी रूप से, मेरे लिए तनाव मुक्त रहने के लिए अकेले समय बिताना बहुत कारगर साबित होता है और ऐसा समय न मिलना मेरी मानसिक थकान का एकमात्र कारणबन जाता है, यह समय आपको विचारों में स्पष्टता और नियंत्रण की भावना प्रदान करता है और जीवन के उतार-चढ़ाव से निपटने की के लिए आवश्यक ऊर्जा भी प्रदान करता है।

हम अपने जीवन में लोगों की सराहना करना सीख जाते हैं :

जितना अधिक मात्रा में हमारे पास कुछ होता है, उतना ही हम उसे गंभीरता से नहीं लेते। यह बात हमारे आसपास के लोगों पर भी लागू होती है। अगर हम हमेशा लोगों से घिरे रहते हैं, तो हम भूल जाते हैं कि वे हमारे लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं। अकेले समय व्यतीत करना ही हमें याद दिलाता है कि कैसे हमारे करीबी और प्रिय लोग हमारे जीवन को समृद्ध करते हैं, इससे उनके साथ हमारे संबंध भी मजबूत होते हैं।

 हम किसी प्रियजन के जाने के दुख से बेहतर उभर सकते हैं

अगर हमें कभी किसी प्रियजन की मृत्यु के हादसे से गुज़रना पड़े तो, उससे उभरना इसलिए थोड़ा आसान हो जाता है, कि हम अपनी खुशियों के लिए आत्मनिर्भर रहने में सक्षम होते हैं। उस शक्स की कमी तो हमेशा महसूस होगी लेकिन अकेले काम करने की आदत होने से आप दूसरों की तुलना में ,बहुत बेहतर स्थिति में होंगे।

आपके आसपास के लोगों का साथ शानदार हो सकता है, लेकिन आप जितना समय दूसरों के साथ व्यतीत करते हैं, उतना ही स्वयं के साथ भी करना चाहिए ताकि आप अधिक स्वस्थ और बेहतर व्यक्ति बन सकें

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