आखिर क्यों है युवा सेल्फी के दीवाने, क्या है सेल्फी!

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दुनिया भर में शायद ही कोई मोबाइल फोन यूजर होगा जिसने सेल्फी का नाम ना सुना हो, युवा तो सेल्फी के पीछे पागल हैं, सेल्फी का क्रेज हर उम्र के लोगों में दिखाई देता है, ये ऐसा दौर है जब सेल्फी के लिये स्पेशल कैमरा फोन बनाये जा रहे हैं तो क्या आप जानना नहीं चाहेगें कि ये सेल्फी शब्द अचानक से कहां से आया सेल्फी का इतिहास क्या है और साथ ही सेल्फी के फायदे और नुकसान क्या है तो आईये जानते हैं सेल्फी क्या है?
सेल्फी का अर्थ है एक ऐसी तस्वीर जो अपने कैमरे, स्मार्टफोन या वेबकैम से खुद ही खींची हो, तो सेल्फी का मतलब आप जानते ही हैं खुद ही अपनी तस्वीरें खींच कर सोशल मीडिया पर अपलोड और शेयर करने का चलन ‘सेल्फी’ नाम से जाना जाने लगा है। सेल्फी आज के डेट में एक फैशन और दीवानापन है ’ लोग रोज सोशल साइट पर अपने सेल्फी अपलोड करते हैं और उसके साथ एक मस्त कैप्शन भी लिखते हैं। कैप्शन के शब्द भी जबरदस्त होते हैं ।

आज इंटरनेट पर सेल्फी की बाढ़ सी आ गई है। हालाँकि कुछ सेल्फिज खास अवसरों (काम,शादी,जीत की खुशी, उपलब्धि आदि) पर ली जाती है पर ज्यादातर सेल्फिज को किसी भी अवसर की आवकश्यकता नहीं होती है। स्पेशल फिल्टर ऐप जैसे इंस्टाग्राम और स्नैपचैट यह सुनिश्चित करते हैं की हम सिर्फ अच्छी सेल्फिज फिल्टर कर पोस्ट करें।

हम सेल्फ़िज़ क्यों लेते है?
सबसे बड़ा स्पष्टीकरण है,नियंत्रण:
हम सेल्फ़ी को लेते समय तस्वीर की गुणवत्ता को नियंत्रित कर सकते हैं। यह उस समय नहीं हो सकता जबकि कोई अन्य हमारी तस्वीर लेता है।
हम कई फिल्टर्स से कोई एक सेल्फ़ी चुन सकते हैं जो हमे पसंद हो।
हम कोण और प्रकाश का चुनाव कर सकते हैं।
हम कई तस्वीरें ले सकते हैं और फिर उनमें से सबसे अच्छी तस्वीर चुन सकते हैं। यह उस समय नहीं हो सकता जबकि कोई अन्य हमारी तस्वीर लेता है।
अत: सेल्फी दूसरों को हम कैसे दिखते हैं,इसके नियंत्रण में हमें मदद करती है।

तो हम कैसे दिखते हैं, इसका नियंत्रण हम क्यों चाहते हैं?

इसका उत्तर स्वयं को आईने में देखने जैसा है। यह परिकल्पना इस तर्क पर आधारित है कि डिजिटल रूप से जुडी दुनिया में दूसरों की आँखों में अपना मूल्य पाने की धारणा बहुत बढ़ गई है। अक्सर लोग इस बात को भी पोस्ट कर रहे हैं कि वे हर मिनट क्या कर रहे हैं। इसी प्रतिस्पर्धा में कि हमारे जीवन में क्या हो रहा है,इसकी तस्वीर भी हम पोस्ट करना चाहते हैं ।हम उन्ही तस्वीरों को पोस्ट करना चाहते हैं जिनमें हम अच्छे और खुश नज़र आते हैं। आज कल हमारा आत्मसम्मान पहले की अपेक्षा अब इस बात पर ज्यादा केंद्रित है कि दूसरे हमारे बारे में क्या सोचते हैं। अधिक प्रशंसा ना मिलने पर लोग अपना धैर्य खो रहे हैं। इसीलिये जब लोग अपना सम्मान और आत्म विश्वास दूसरों के नज़रिये से देखने लगे हैं,वे स्वयं को सबसे अच्छा दिखाना चाहते हैं,ज्यादा से ज्यादा लोगों की प्रशंसा और ध्यान पाना चाहते हैं और स्वयं के बारे में अच्छा अनुभव करना चाहते हैं।

तो क्या हम अब खुश हैं क्योकि अब हम बहुत सारी सेल्फ़ी ले रहे हैं?

इन पर हुए शोध काफी बंटे हुए हैं। कुछ महिलाओ पर हुए अध्ययन में यह पाया गया है कि उनकी ज्यादा प्रशंसा और सकारात्मक टिप्पणी स्वयं के बारे में अच्छा सोचने और अनुभव करने में मदद करती है।

कुछ दूसरे अध्ययन यह बताते हैं की लोग सोशल मीडिया पर प्रशंसा (लाइक्स) पर इतना भरोसा करते हैं कि नकारात्मक टिप्पणी मिलने पर उनका आत्मविश्वास बुरी तरह प्रभावित हो जाता है। इसलिए स्वयं के बारे में ज्यादा मूल्यांकन, प्रशंसा या नकारात्मक टिप्पणी हमारे आत्मविश्वास और आत्मसम्मान के लिए हानिकारक हो सकता है। एक और अध्ययन के अनुसार सेल्फ़िज़ की सनक वाले जो लोग अधिक सेल्फ़ी लेते हैं वे अहंकारी होते है अथवा वे लोग जो हद से ज्यादा के स्तर पर स्वयं को प्यार करते हैं, इतनी अधिक सेल्फ़िज़ के द्वारा वे अपनी आत्मप्रशंसा की इच्छा को पूरी करते हैं। हालाँकि अध्ययन यह भी कहते हैं कि अहंकारी लोगों का स्वयं के प्रति संदेह गंभीर स्तर पर होता है। इसलिए वे बहुत सारी प्रशंसा पहले स्थान से पाना चाहते हैं।

इन अध्ययनों से अलग, एक प्रश्न समय की मांग है कि, क्या हम तस्वीरों को नियंत्रित करते हैं,या तस्वीरें हमें?

क्या आप विश्वास करेंगे कि पहली सेल्फ़ी 1939 में फङ्मुी१३ उङ्म१ल्ली’्र४२ ने ली थी? यहाँ पर सेल्फ़ी के बारे में कुछ तथ्य दिए गये हैं।:

1) आज कल परफेक्ट सेल्फ़ी लेने की कोचिंग भी शुरू हो गई है। विद्यार्थियों में ज्यादातर महिलाएँ होती हैं।
2) सेल्फ़ी इतनी पॉपुलर है कि आतंकवादी भी आज कल इसे लेने लगे हैं।
3) जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेश जाते हैं तो कम से कम २ सेल्फ़ी लेते हैं।
4) बराक ओबामा भी रोज़ 1 सेल्फ़ी लेते हैं

सेल्फी के नुकसान

विश्व की उभरती हुई गंभीर समस्याओं में प्रमुख है मोबाइल कैमरे के जरिए सेल्फी लेना। इन दिनों मोबाइल कैमरे के जरिए सेल्फी यानी अपनी तस्वीर खुद उतारने के शौक के जानलेवा साबित होने की खबरें आए दिन सुनने को मिल रही हैं। नई पीढ़ी इस जाल में बुरी तरह कैद हो गयी है। आज हर कोई रोमांचक, हैरानी में डालने वाली एवं विस्मयकारी सेल्फी लेने के चक्कर में अपनी जान की भी परवाह नहीं कर रहे हैं। कोई पानी में छलांग लगाते हुए तो कोई सांप के साथ, कोई शेर, बाघ, चीता के साथ तो कोई हवा में झुलते हुए, कोई आग से खेलते हुए तो कोई मोटरसाईिकल पर करतब दिखाते हुए सेल्फी लेने के लिये अपनी जान गंवा चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि लोग ऐसी घटनाओं से कोई सबक नहीं लेते और सरकारें भी मूकदर्शक बन इन हादसों को देख रही है।

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि हर सेकंड अकेले फेसबुक पर दस हज़ार से ज्यादा सेल्फ़ी अपलोड होती है वह भी केवल भारत से, लेकिन इससे ज्यादा आश्चर्य आपको यह जानकर होगा कि सेल्फ़ी दुर्घटनाओं का कारण भी बन रही हैं एक न्यूज के अनुसार 2014 से सितंबर, 2016 के बीच दुनिया भर में सेल्फी लेने के चक्कर में 127 लोगों ने जान गंवाई, जिनमें से लगभग 60% यानि 76 मौतें भारत में हुई हैं ये आंकडा चौकाने वाला है

ऐसे देश जहां सेल्फी लेने के चक्कर लोगों अपनी जान गवांई है उन्हें सेल्फी डेथ कंट्री में शामिल किया गया जिसमें अब भारत भी है, सरकार ने ऐसी कई जगहों पर नो सेल्फी जोन बनायें हैं जहां सेल्फी लेना खतरनाक हो सकता है

  • इसके अलावा ज्यादा सेल्फी लेने का शौक कई सारी मनोवैज्ञानिक बीमारियों को जन्म दे रही है
  • कुछ मामलों में लोग कॉस्मेटिक सर्जरी करा रहेे हैैं कि उनकी सेल्फी अच्छी आये
  • सेल्फी लेने आदत लोगों के रोज के काम में बाधा भी डाल रही है
  • सेल्फी लेने के बाद उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं किया जाये तो उसे बेचैनी होने लगती है

 

 

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